Saturday, April 13, 2013

अब ....... जब,
बूढ़े बरगद में गूलर नहीं लगती,
और चौपाल की सीमेंट उधड़ गयी है,
कल्लू के दुआरे का इनारा सूख गया है,
और बौरों का अम्बियों से मन रूठ गया है,
अब ........ जब,
साइकिल पर मलाईवाला नहीं आता,
और यहाँ कोई सोहर नहीं गाता,
कुंजड़े को मरे सात बरस हुए,
कोई यहाँ चूड़ी नहीं लाता ,
अब…. ....जब,
एक अरसा गुज़र गया,
और अंखियन से मन भर गया,
तुम क्या बतलाने आये हो,
किसकी सुध लेने आये हो…. 

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