बरसाती मौसम में
अधखुले छातों पर,
उधड़े हुए ख्वाबों में
बिन ब्याही रातों पर,
जीवन के चौसर में
बीती बिसातों पर,
गुमसुम ख़ामोशी में
सादे जज्बातों पर,
क्यूँ हम आघात करें,
आओ फिर बात करें
अधखुले छातों पर,
उधड़े हुए ख्वाबों में
बिन ब्याही रातों पर,
जीवन के चौसर में
बीती बिसातों पर,
गुमसुम ख़ामोशी में
सादे जज्बातों पर,
क्यूँ हम आघात करें,
आओ फिर बात करें
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