जिगर के उन्मुक्त उमंगों की कहानी थी कभी,
जब बढे, रोमांच की दिलकश जवानी थी कभी,
क्या हुआ जो आज फिर ये छोड़ कर हमको गई,
बचपने से साथ थी, आखिर गँवानी थी कभी;
जब बढे, रोमांच की दिलकश जवानी थी कभी,
क्या हुआ जो आज फिर ये छोड़ कर हमको गई,
बचपने से साथ थी, आखिर गँवानी थी कभी;
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