ये शहर, ये रास्ते जो साथ चले थे कभी,
बड़े गुमसुम से किसी बादल को तरसते हैं,
ये इंतज़ार है जो पानी सा जमा होता है,
भर जाता है तो आँखों से बरसते हैं
बड़े गुमसुम से किसी बादल को तरसते हैं,
ये इंतज़ार है जो पानी सा जमा होता है,
भर जाता है तो आँखों से बरसते हैं
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