काफ़ी
इंतज़ार के बाद रात की हुई भारी बारिश एक भीगी सुबह लेकर आई है / कालोनी
के अन्दर की सड़क पर पानी अब भी जमा हुआ है और इस पर चलते हुए चप्पलों की
छपाक छपाक की आवाज़ चिर परिचित लगती है / पेड़ पौधों के रंग बदले हुए हैं;
हलकी हवा में गमलों में लगे पौधे कुछ गर्व से हिलते हैं , उसी तरह जैसे
गाँव का लड़का नौकरी मिलने के बाद अकड़ कर चलता है / सड़क उस पार से काफ़ी
मिटटी पानी के साथ बहकर इस ओर चली आई है कीचड़ की शक्ल में / लोग नाप तोल कर
कदम रखते हैं और कीचड़ से बचकर उस ओर पहुँचते हैं जहाँ सुबह दूध की थैलियाँ
बिकती हैं; सड़क पर पैदल चलने वाले लोग सामने से आती गाड़ी देख अपनी रफ़्तार
तेज़ और धीमी कर लेते हैं; ताकि गाड़ियों के द्वारा सड़क से उछले पानी से
उनका मिलाप बच सके / सब कुछ वैसा ही है जैसा कल था / सात आठ महीने के
अंतराल के बाद बारिश हुई और पहले ही दिन सब कुछ कितना जान पहचाना सा लगता
है / जैसे ये तो रोज़ की बात है; हम इन जानी पहचानी स्थितियों को कितनी
आसानी से जी लते हैं / ये जितना सरल है उतना ही आश्चर्यजनक भी है / समय की
दूरी भी हमारे मौसम को एक दिन के लिए भी हमसे अलग नहीं कर पाती / पर क्या
इंसानी रिश्तों पर भी ये बात लागू होती है ? ये सरल भी है और आश्चर्यजनक भी
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