Tuesday, July 3, 2012

सूख कर पलकों पे ये नींदों से नागा करते हैं,
कंटीले रास्ते हैं, हम जहाँ पर रोज़ भागा करते हैं,
कि रखना हौसला नीरज छलकते इन अंधेरों में,
दिवस के कुछ सपन रातों में जागा करते हैं ;

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