Wednesday, June 6, 2012

हर लफ्ज़ तेरा बयां है
हर सफे पे तेरा नाम हैं
तू ही आसमां, तू ज़मीन है
इक तू ही मेरा यकीन है
इक तू ही तो आगाज़ था
इक तू ही बस अंजाम है
   by manjula saxena

आसमां भी तू, ज़मीं भी तू, यकीं भी तू,
दिल और होठों की मिश्रित हंसी भी तू,
आगाज़ भी तू, अंदाज़ भी तू, अंजाम भी तू,
तू ही लफ्ज़, तू ही पहचान और नाम भी तू,
जब हर लम्हा, हर एहसास तुझसे ही आया है,
तो ये कौन है जिसने गलत सही बनाया है !!
         -neeraj

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