तुम जो कहते थे दोस्ती है,
हमने सोचा था आजमाएंगे;
तुम हमेशा आसरा दिखाते थे,
सोचा हम भी आशियाँ लुटाएंगे;
तुम किनारे पर मगर कैसे पहुंचे,
हमने सोचा था, दोनों डूब जायेंगे;
तुम जिस गली में रहते हो,
हम वहां अब गश्त न लगायेंगे;
तुम्हारा दामन पाक रहे हरदम,
हम गुनाहों का खाम्याज़ा पायेंगे;
तुमने तोड़े थे जो पेड़ों के पत्ते,
सूख गए हैं, हम उन्हें जलाएंगे;
तुम्हारी जिंदगी, जिंदगी रहे 'नीरज',
अज़ल से पर हम भी न मात खायेंगे;
तुम तबस्सुम को सदा सजाए रखना,
अरमां रहा तो हम भी मुस्कुराएंगे;
हमने सोचा था आजमाएंगे;
तुम हमेशा आसरा दिखाते थे,
सोचा हम भी आशियाँ लुटाएंगे;
तुम किनारे पर मगर कैसे पहुंचे,
हमने सोचा था, दोनों डूब जायेंगे;
तुम जिस गली में रहते हो,
हम वहां अब गश्त न लगायेंगे;
तुम्हारा दामन पाक रहे हरदम,
हम गुनाहों का खाम्याज़ा पायेंगे;
तुमने तोड़े थे जो पेड़ों के पत्ते,
सूख गए हैं, हम उन्हें जलाएंगे;
तुम्हारी जिंदगी, जिंदगी रहे 'नीरज',
अज़ल से पर हम भी न मात खायेंगे;
तुम तबस्सुम को सदा सजाए रखना,
अरमां रहा तो हम भी मुस्कुराएंगे;
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