जब स्याह लगे दुनिया सारी,
बीते सदमों की डाह रहे,
जब लगे तिमिर की है बारी,
औ भीतर बस इक आह रहे;
तब रखना सिहरन हाथों में,
औ रखना थिरकन साँसों में,
बेशक अंधियारा बढ़े चले,
पर रखना जुगनू आँखों में,
तब आशाओं की धरती पर,
ठहरा सा नीर भी चमकेगा,
औ रखना थिरकन साँसों में,
बेशक अंधियारा बढ़े चले,
पर रखना जुगनू आँखों में,
तब आशाओं की धरती पर,
ठहरा सा नीर भी चमकेगा,
तब स्याह में भी किरणें होंगी,
तब चाँद ज़मीं पर उतरेगा;
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