कब बदल जाती है दिशा, हवाओं की,
कब बदल जाती है अहमियत, कुछ भावों की,
बदल जाती है कब महक फसलों की,
कब बदल जाती है शक्ल, हमशक्लों की,
पता ही नहीं चलता....
कब बदल जाता है वेग इन लहरों का,
कब बदल जाता है मौसम इन शहरों का,
बदल जाता है कब, महल कुछ सपनों का,
कब बदल जाता है अरमां कुछ अपनों का,
पता ही नहीं चलता....
कब किन्ही एहसानों की मियाद बदल जाती है,
कब अंधेरों में घुटन की सांस बदल जाती है,
बदल जाती है कब पहचान खारे पानी की,
कब बदल जाती है हुंकार जवानी की,
पता ही नहीं चलता....
कब स्याह केशों का रंग बदल जाता है,
कब पिता और सेहत का संग बदल जाता है,
बदल जाता है कब धैर्य माँ के घुटनों का,
कब बदल जाता है संसार मेरे अपनों का,
पता ही नहीं चलता....
कब बदल जाती है अहमियत, कुछ भावों की,
बदल जाती है कब महक फसलों की,
कब बदल जाती है शक्ल, हमशक्लों की,
पता ही नहीं चलता....
कब बदल जाता है वेग इन लहरों का,
कब बदल जाता है मौसम इन शहरों का,
बदल जाता है कब, महल कुछ सपनों का,
कब बदल जाता है अरमां कुछ अपनों का,
पता ही नहीं चलता....
कब किन्ही एहसानों की मियाद बदल जाती है,
कब अंधेरों में घुटन की सांस बदल जाती है,
बदल जाती है कब पहचान खारे पानी की,
कब बदल जाती है हुंकार जवानी की,
पता ही नहीं चलता....
कब स्याह केशों का रंग बदल जाता है,
कब पिता और सेहत का संग बदल जाता है,
बदल जाता है कब धैर्य माँ के घुटनों का,
कब बदल जाता है संसार मेरे अपनों का,
पता ही नहीं चलता....
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