बरगद की झूलती लताएं धरती का स्पर्श चाहती हैं,
बोलती नहीं, पर आस लिए नीचे को बढ़ती हैं.
वहां जहाँ इनके अस्तित्व की जड़ें रहती हैं,
क्या हम अपनी जड़ें पहचानते हैं?
या बस सुनते हैं और मानते हैं.......
बोलती नहीं, पर आस लिए नीचे को बढ़ती हैं.
वहां जहाँ इनके अस्तित्व की जड़ें रहती हैं,
क्या हम अपनी जड़ें पहचानते हैं?
या बस सुनते हैं और मानते हैं.......
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