Friday, October 14, 2011

सब कुछ खो जाने पर भी

कल अपना था, आज पराया,
जब ये पचा न सको,
लाख कोशिशों के बाद भी,
जब कुछ बचा न सको,
तब भी बोझिल मत होना,
बेशक थोड़ा रो लेना,
पर साँसों को मत खोना,
जीवन में ऐसे मौके,
बस आते जाते रहते हैं,
रोज़ खिले हैं फूल यहाँ,
रोज़ कुम्हलाये रहते हैं,
जो आता है, जाएगा भी,
जो खोता है, पायेगा भी,
जो होनी है सो होनी है,
तब खोना कैसी अनहोनी है,
ऊपर बैठा करे तमाशा,
सारी श्रृष्टि रचा करता है,
पर सब कुछ खो जाने पर भी,
एक भविष्य बचा रहता है,

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