रास्तों के जुगनू
Thursday, March 11, 2021
धंसे तीर से उपजा नीर ही सही,
कामना भी कुछ अधीर ही सही,
ये भी हासिल नहीं अधिकतर को,
प्रेम न बन सके तो पीर ही सही;
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment