पल जो आया था, पल गया यूँ ही,
कल जो आया था, कल गया यूँ ही,
ज़िंदगी फिर से तेरी चाहत में,
एक दिन और ढल गया यूँ ही।
वो सुबह का इक बड़ा सपना,
हमको लगता था जो सदा अपना,
आज सपना बदल गया यूँ ही,
एक दिन और ढल गया यूँ ही।
जो गुज़र जाती थीं हमें थामें,
वो किनारा वो अधबुनी शामें,
सोच उनको मचल गया यूँ ही,
एक दिन और ढल गया यूँ ही।
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