किसी दिन,
जब बैठो अपनी चमचमाती गाड़ी में,
और एडजस्ट करो अपने गोगल्स,
रियर व्यू मिरर में,
और म्यूजिक चल रहो हो ज़ोर से,
थोड़ा और तेज़ कर एयर कंडीशनर ,
निकल जाओ तुम,
एक लॉन्ग ड्राइव पर......
किसी दिन,
जब महज़ मोबाइल पर,
तुम्हारी ऊँगली की हरकत से,
सज जाए तुम्हारे खाने की मेज,
हर उस व्यंजन से,
जो चाहा तुमने,
अपने मेहमानों के लिए,
शहर के चुनिंदा होटलों से ........
किसी दिन,
जब पानी की बौछारें,
पड़ती हों तुम पर,
नाइग्रा फाल्स में,
और टाइम्स स्क्वायर की चकाचौंध,
कर दे तुम्हे विस्मृत,
और फिर निकल जाओ तुम,
डिस्नी लैंड की सैर को .......
किसी दिन,
जब अपने नन्हे हाथों से,
तुम्हारी उँगली पकड़,
धीमे धीमे चलते हुए,
दिखाओ उसे खेत खलिहान,
पीली फूली सरसों, जवार, कनक, बाजरा,
और अचंभित सी सवाल पूछती रहे,
तुम्हारी पोती .......
किसी दिन,
जब दिन हों इस तरह,
और लगे की सार्थक हुआ जीना,
तो हो सके तो याद करना,
जब दो हाथ दूर रहना पड़ा अपनों से,
और एक देश संकुचित हो गया था,
अपने अपने घरों में,
हो सके तो याद करना,
ये इक्कीस दिन।
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