यादों की मीठी स्याही से,
तन पर लिपटे कागज़ पर,
किसी छुअन की एक कलम से,
सिहरन के एहसासों पर,
अपने इन बेसुध भावों से,
तेरे पूर्ण समर्पण पर,
सब कुछ भी निचोड़ कर प्रियतम,
कर दूँ तुझको अर्पण पर ….
कैसे मैं संगीत लिखूंगा,
अब बस मन में गीत लिखूँगा ;
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