कल तक सोचते थे,
बस वहाँ पहुँच जाएँ,
फिर चैन से ज़िन्दगी बिताएँ;
सोचते सोचते, प्रयासों के पश्चात,
बदल गए अपने हालात,
लगता था सब खिला खिला,
पर चैन अब भी नहीं मिला;
कोई कैसी कहानी लिखता है,
आगे अब और कुछ दिखता है,
फिर सोचते हैं, करते हैं प्रयास,
कभी न ख़त्म होती है आस,
इसीलिए बस मानव हैं हम,
कोई साधू संत नहीं हैं,
चलते रहते रुक कर, थक कर,
इस सफ़र का कोई अंत नहीं है;
बस वहाँ पहुँच जाएँ,
फिर चैन से ज़िन्दगी बिताएँ;
सोचते सोचते, प्रयासों के पश्चात,
बदल गए अपने हालात,
लगता था सब खिला खिला,
पर चैन अब भी नहीं मिला;
कोई कैसी कहानी लिखता है,
आगे अब और कुछ दिखता है,
फिर सोचते हैं, करते हैं प्रयास,
कभी न ख़त्म होती है आस,
इसीलिए बस मानव हैं हम,
कोई साधू संत नहीं हैं,
चलते रहते रुक कर, थक कर,
इस सफ़र का कोई अंत नहीं है;
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