मोड़ने से राह मुड़ जाए अगर, तो मोड़ दो,गाँठ को समतल बना पाओ अगर, तो जोड़ दो,यूँ ही नीरज आस को कब तलक ढोते रहोगे,छोड़ने से छूट जाता है अगर, तो छोड़ दो;
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