Friday, July 1, 2022

 

 

बादलों ने यूँ है घेरा,
सब तरफ छाया अँधेरा,
बिजलियाँ भी कड़कड़ा कर,
करती हैं रह रह के फेरा;
आज ये मौसम अड़ा है,
बन के इक तूफ़ां खड़ा है,
पर इसी ने है बताया,
वक़्त का पहिया बड़ा है;

हमने कब घड़ियाँ बुनी थी,
गड़गड़ाहट ही सुनी थी,
चल सकें बस इसलिए ही,
धूप थोड़ी सी चुनी थी;

आँधियां भी आँख मींचे,
चाहे जितना ज़ोर खींचे,
चल रहे हैं हम डगर पर,
मुट्ठियों में धूप भींचे ;

 

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