Monday, February 28, 2022


कहीं इत्र, पान, चन्दन है,
मादक है खुशबु भीनी,
कहीं बेल पत्र में चेहरा,
कहीं भांग में है शौकीनी,

कहीं दुग्ध गाय की धारा,
केसर है, शहद, शमी है,
कहीं फूल मदार विवश है,
बेबस सी कहीं नमी है,

कोई याद करे उपवासों को,
कोई बिसर गया है सावन,
कोई रहा धतूरा जीवन भर,
कोई गंगाजल सा पावन,

रुँधने पर भी जो सरल रहे,
वह कंठ कहाँ हम पाते,
जो पी ले गरल आज मन का,
वह शिव हम कहाँ से लाते।

 

No comments:

Post a Comment