सारे दोस्त तुम बेशक ही मवाली रखना,
पर कम से कम उनमें एक सवाली रखना;
मुसीबत कभी अकेली ही नहीं आती,
बन्दूक भी जो रखना तो दुनाली रखना;
ख़ुशहाली से नीयत भी बिगड़ सकती है,
कभी कभी अलमारी भी खाली रखना;
मुस्कुरायेंगे लोग कागज़ के फूलों जैसे,
पर तुम भी अदा अपनी निराली रखना;
जब न रहेंगे दीये घरों की चौखट पर,
तुम तब भी इन आँखों में दिवाली रखना।
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