रास्तों के जुगनू
Tuesday, April 13, 2021
आशंकाओं की झड़ी,
चिंताओं की लड़ी,
जो हुआ उसका ग़म,
कब होगा दर्द कम,
बिछड़ी देह का बाशिंदा,
बस टूटे स्वप्न सह रहा है,
बुन नहीं रहा,
और एक ये समय है कि,
बस कह रहा है,
सुन नहीं रहा।
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