Monday, January 1, 2018

बंगाली है एक अनोखी भारत को सौगात,
मुहँ हम पूरा खोला करते जब करते हैं बात।
तभी भजन भोजन कहलाता हैप्पीनेस आनन्दो,
​नीरज की घोड़ी के देखो कांटे हो गए बोन्दो। 
​आज अपर्णा स्वयं अनिल को देती है आशीष,
रहो सुहागन तुम दोनों बच्चे हों पूरे बीस। ​
​और सखी है एक माधवी जिसकी लम्बी जीभ,
क्या जाने क्या होती है गंगा जमुनी तहज़ीब।
ना ही अहमदाबाद मिले ना मिले इलाहाबाद,
लेकिन यादों का जीवन तो सदा रहा आबाद।​
                            

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