रास्तों के जुगनू
Thursday, November 7, 2013
कुछ लगामों के बंधन … लगाने पड़ेंगे,
रूठे कुछ मेहरबां भी ……. मनाने पड़ेंगे,
इंतज़ार में तो ये रात न ढलेगी 'नीरज',
अब दिन आयेंगे नहीं … बनाने पड़ेंगे।
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