Wednesday, August 27, 2025

 

 

फलक से हाथ की दूरी तलक आये हैं,
कि सितारे भी हवा में झलक आये हैं,
पलक की है सादगी, या साथ का असर,
ये उजाले पानियों तक छलक आये हैं ;

​अँधेरे चाहे जितना अपना भार लाये हैं,
​हम भी अपने संग में पतवार लाये हैं,
​लहर का वेग होकर चकित ये कह रहा है, 
नाव नहीं हम, जीवनी का सार लाये हैं;

 

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