रास्तों के जुगनू
Saturday, December 27, 2014
राह चलते हर कोई अपना नहीं होता,
जो मगर होता है वो सपना नहीं होता,
दोस्त ही कहते हैं नीरज अपनों को ठरकी,
सपना अपना हो भी तो अपना नहीं होता,
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