another perspective...
क्या तुम दहेज़ देना चाहती हो ?
नहीं .... बिलकुल नहीं।
तो कैसा दूल्हा चाहिए तुम्हे ?
वह जो रख सके संभाल के,
जिम्मेदार हो, अच्छी नौकरी हो,
पैसे वाला हो, दिल का निराला हो,
जैसा मैं चाहती हूँ , वैसा परिवार हो ,
हट्टा कट्टा, दिखने में शानदार हो।
क्या तुम दहेज़ लेना चाहते हो ?
नहीं .... बिलकुल नहीं।
तो कैसी दुल्हन चाहिए तुम्हे ?
वह जो गोरी हो, सुन्दर हो, सुशील हो,
पढ़ी लिखी हो, संस्कारी हो,
अच्छी कुक भी हो, नौकरी वाली हो,
जो मॉडर्न भी हो, और हो किस्मती भी,
अपने पुश्तैनी जायदाद का कानूनन हक़ ले सके,
हो इतनी हिम्मती भी।
मैं भी सोचता हूँ, दहेज़ क्या है,
क्या वो जो माँगा जाता है, या दे दिया जाता है,
या कुछ और भी जो चाहते हैं हम,
क्या सब लड़के कमाऊ हैं या सब सब लड़कियाँ सुन्दर,
क्या मिल पाती है हर लड़की को उसका हिस्सा,
उसकी पुश्तैनी जायदाद से,
क्या दहेज़ करता है समझौता या भरपाई,
जहाँ नहीं हो पाती घरों में गाढ़ी कमाई,
मुझे सच में नहीं पता दहेज़ प्रथा है या सोच,
आपको पता हो तो बताना !
neeraj tripathi.....thinking aloud.
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