Friday, January 22, 2021

पुरानी चोटों का दर्द,
जोड़ों में इकठ्ठा हो जाता है,
और अँधेरे दिनों में,
धीरे धीरे रिसता है,
जैसे बीती बरसात का,
छत पर जमा पानी,
कमरे में बेमौसम,
टप टप टपकता है;
पर ये कोई अभिशाप नहीं है,
कोई सज़ा, कोई पश्चाताप भी नहीं,
कुछ पाने या खोने का,
उल्लास या संताप भी नहीं,
ये तो बस,
समय का सिद्धान्त है,
किन्ही गुज़री घटनाओं का,
उपरान्त है,
कोई बहुत बड़ी सीख या टीस नहीं,
ये तो बस,
एक यात्रा का वृत्तान्त है;

 

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